☘️🌹ॐनमो नारायणाय 🌹☘️

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

सोम प्रदोष व्रत :

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व है। 

यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। 

ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा - अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्टों का अंत होता है। 

प्रत्येक माह में दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में।


प्रदोष व्रत कब है ?

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 जून को देर रात 01 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी। 

वहीं, इसकी समाप्ति 23 जून को रात 10 बजकर 09 मिनट पर होगी। 

इस दिन प्रदोष काल की पूजा का महत्व है। ऐसे में 23 जून को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 

इस के साथ ही भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 22 मिनट से लेकर 09 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।


प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व :

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। 

प्रदोष शब्द का अर्थ है रात की शुरुआत होने वाला समय, जो सूर्यास्त के बाद और रात्र के आगमन से पहले का समय होता है। 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और सभी देवी - देवता उनकी पूजा करते हैं। 

इस शुभ समय में शिव पूजा करने से भक्तों को रोग - दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख - शांति आती है।


प्रदोष व्रत पूजा विधि :

इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।

इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

सुबह भगवान शिव की पूजा विधिवत करें।

इसके बाद शाम के समय एक वेदी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

गंगाजल से अभिषेक करें।

उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फल और मिठाई आदि चीजें चढ़ाएं।

'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करें।

शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।

अंत में आरती कर भगवान से प्रार्थना करें।


☘️🌹ॐनमो नारायणाय 🌹☘️

*एक बूढ़ी माता मंदिर के सामने भीख मांगती थी , एक संत ने कहा , आपका बेटा लायक है , फिर यहां क्यों ? बुढ़िया बोली बाबा , मेरे पति का देहांत हो गया है , मेरा पुत्र परदेस नौकरी के लिए चला गया , जाते समय मेरे खर्चे के लिए कुछ रुपए देकर गया था , वे खर्च हो गये , इसीलिए भीख मांग रही हूँ । मेरा बेटा हर महीने एक रंग बिरंगा कागज भेजता है जिसे मैं दीवार पर चिपका देती हूँ ।*
 *संत ने उसके घर जाकर देखा कि दीवार पर साठ (60) बैंक ड्राफ्ट चिपका के रखे थे ,प्रत्येक ₹50,000 राशि के थे ,पढ़ी लिखी न होने के कारण वह नहीं जानती थी कि उसके पास कितनी संपत्ति है , संत ने उसे ( ड्राफ्ट) का मूल्य समझाया ।*

 *उस माता की भांति हमारी स्थिति ऐसी ही है , हमारे पास धर्म ग्रंथ तो हैं पर माथे से लगाकर अपने घर में सुसज्जित करके रखते हैं जबकि हम उनका वास्तविक लाभ तभी उठा पाएगें जब उनका अध्ययन , चिंतन , मनन करके जीवन में उतारेगें और प्रभु का नाम ले कर भजन व सत्संग करेंगे ।*.... 
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पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 25 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Dhanlakshmi Strits , Marwar Strits, RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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